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ब्रह्म पुराण e-book

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ब्रह्म पुराण हिन्दू धर्म के 18 महापुराणों में से एक प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, ब्रह्मा जी की महिमा, विभिन्न देवताओं का वर्णन, तीर्थों का महत्व और धर्म के सिद्धांतों का विस्तार से उल्लेख मिलता है। यह पुराण भक्ति, धर्म और नैतिक जीवन के आदर्शों को स्थापित करता है तथा सनातन परंपरा के आध्यात्मिक ज्ञान को सरल कथा शैली में प्रस्तुत करता है।

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ब्रह्म पुराण को महापुराणों में प्रथम स्थान प्राप्त है। यद्यपि इसका नाम ब्रह्मा जी के नाम पर है, परंतु इसमें भगवान विष्णु और शिव सहित समस्त देवताओं की महिमा का वर्णन भी मिलता है। यह ग्रंथ सृष्टि की रचना (सर्ग), प्रलय, मन्वंतर, वंशावली और विभिन्न युगों के इतिहास का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।

इस पुराण में विशेष रूप से तीर्थ महात्म्य का वर्णन प्रमुख है, खासकर पुरी (जगन्नाथ धाम) और अन्य पवित्र स्थलों की महिमा का विस्तार से उल्लेख मिलता है। इसमें धर्म, व्रत, दान, यज्ञ और सदाचार के महत्व को समझाया गया है। साथ ही राजधर्म, गृहस्थ धर्म और समाज व्यवस्था के सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला गया है।

ब्रह्म पुराण केवल पौराणिक कथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह जीवन के नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक उन्नति का मार्गदर्शक ग्रंथ है। इसमें यह बताया गया है कि सत्य, दया, तप और भक्ति के माध्यम से मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

🔸 आध्यात्मिक महत्व:

सृष्टि और प्रलय का विस्तृत वर्णन

तीर्थों और धार्मिक स्थलों का महत्व

धर्म और सदाचार की शिक्षा

मोक्ष प्राप्ति का मार्गदर्शन

ब्रह्म पुराण आज भी धार्मिक अध्ययन, कथा-श्रवण और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

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