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अग्नि पुराण

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अग्नि पुराण अठारह महापुराणों में से एक महत्वपूर्ण पुराण है। यह मुख्यतः अग्निदेव और महर्षि वशिष्ठ के संवाद के रूप में प्रस्तुत है। इसमें धर्म, राजनीति, वास्तुशास्त्र, आयुर्वेद, ज्योतिष, मंत्र-तंत्र, शिल्पकला और विभिन्न धार्मिक विधियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह पुराण धार्मिक ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के अनेक विषयों का भी मार्गदर्शन करता है।

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अग्नि पुराण हिंदू धर्म के महापुराणों में एक अत्यंत व्यापक और ज्ञानप्रधान ग्रंथ माना जाता है। इसका स्वरूप संवादात्मक है, जिसमें अग्निदेव द्वारा महर्षि वशिष्ठ को विविध विषयों का उपदेश दिया गया है। इसमें लगभग 15,000 से अधिक श्लोक माने जाते हैं (विभिन्न संस्करणों में संख्या भिन्न हो सकती है)।

इस पुराण की विशेषता यह है कि यह केवल धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन के अनेक व्यावहारिक और शास्त्रीय विषयों का समावेश है।

इसमें निम्नलिखित विषयों का विस्तार से वर्णन मिलता है:

  • सृष्टि की उत्पत्ति और देवताओं की कथाएँ

  • अवतारों का वर्णन, विशेष रूप से भगवान विष्णु के अवतार

  • पूजा-पद्धति, यज्ञ-विधि और मंत्र-तंत्र

  • राजधर्म, राजनीति और युद्धनीति

  • वास्तुशास्त्र और शिल्पकला

  • आयुर्वेद और चिकित्सा संबंधी जानकारी

  • ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव

अग्नि पुराण को एक प्रकार से प्राचीन भारतीय ज्ञानकोश भी कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें धर्म, विज्ञान, कला और शासन से संबंधित विविध विषयों का संगठित ज्ञान मिलता है। यह ग्रंथ व्यक्ति को धर्माचरण, नीति, ज्ञान और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

धार्मिक, सांस्कृतिक और शास्त्रीय दृष्टि से अग्नि पुराण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और आज भी अध्ययन एवं अनुसंधान का विषय है।

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