मार्कण्डेय पुराण हिंदू धर्म के प्रमुख महापुराणों में से एक है, जिसका नाम महान ऋषि मार्कण्डेय के नाम पर पड़ा। यह ग्रंथ मुख्यतः ऋषि मार्कण्डेय द्वारा कथित शिक्षाओं और संवादों पर आधारित है। इसमें लगभग 9,000 श्लोक बताए जाते हैं और इसकी रचना शैली सरल एवं उपदेशात्मक है।
इस पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति, मन्वंतर, धर्मशास्त्रीय नियम, राजधर्म, गृहस्थ धर्म, योग, तप और मोक्ष के मार्ग का विस्तार से वर्णन किया गया है।
इसकी सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण विशेषता है देवी महात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ भी कहा जाता है। यह भाग माँ दुर्गा की महिमा, उनके अवतारों और महिषासुर जैसे असुरों के संहार की कथा को दर्शाता है। नवरात्रि के समय इस भाग का विशेष रूप से पाठ किया जाता है।
मार्कण्डेय पुराण में जीवन के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—का संतुलित मार्ग बताया गया है। यह ग्रंथ मनुष्य को सदाचार, भक्ति और आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करता है। धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह पुराण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।





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